सरदारव्सल्फज्ञ (सल्फोमिन)
पौधों को सामान्यतः 16 तत्वों की आवश्यक्ता होती है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के बाद सल्फर पौधों की वृद्धि के लिये अति महत्वपूर्ण है। पौधों में प्रोटिन के निर्माण, नाईट्रोजन के चय-अपचय बढ़ाने के लिये और रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिये अतिरिक्त सल्फर का उपयोग लाभकारी है। सल्फर की कमी से पत्तियों का आकार छोटा हो जाता है, उनका रंग सामान्य हरे से बदल जाता है और मर भी सकता हैं फूलों के सामानय रंग बनाने के लिये सल्फर बहुत उपयोगी है। तिलहनी फसलों जैसे सोयबीन, मूंगफली, सरसों आदि में तेल की अधिक मात्रा बनाने के लिये सल्फर की मुख्य भूमिका होती है। इसका उपयोग सभी प्रकार की सब्जियों विशेषकर प्याज, लहसुन लाभकारी है। सल्फोमिन में सल्फर घुलित अवस्था में नीम सत के साथ में है, जो कि पौधों के ऊपर छिड़कने से तुरंत पत्तियों द्वारा अवशोषित हो जाता है और सल्फर की कमी को पूरा करता है। फसलों, फूलों और सब्जियों में यह फफूंद जनित रोगों जैसे भभूतिया, कुकड़ा आदि को कम करता है और अन्य रोगों से बचाव के लिये पौधों में नुकसान पहुॅचाने वाले छोटे कीड़ों और अन्य बिमारियों से बचाता है। सल्फोमिन का नियमित उपयोग करने से अन्य मंहगे एवं नुकसानदायक कीटनाशकों-फफूंदनाशकों की आवश्यक्ता कम होती है और फसलों में उत्पादन में कमी आती है तथा पैदावार में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है। मात्रा-400 से 500 मि.ली. प्रती एकड़ या 40 से 50 मि.ली. प्रति 16 लीटर पम्प या 3 से 4 मि.ली. प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें। उपयोग- सल्फोमिन का उपयोग सभी प्रकार की फसलों- (तिलहन, दलहन) विशेषकर सोयाबीन, अरहर, मूंगफली, सरसों, चना, आदि एवं सब्जियों में पहला छिड़काव बुआई के बाद 21 से 28 दिन में, दूसरा 35 से 42 दिन में और आवश्यक्ता होने पर विशेष रूप से प्याज, लहसुन आदि में 50 से 57 दिनों में करना चाहिये। फलों में प्रथम छिड़काव फूल आने पर, द्वितीय-फल आने पर और तृतीय फल के विकास के समय पर करना चहिये। फूलों में जैसे-गुलाब, गेंदा, शेवन्ती व सभी प्रकार के फूलों आदि में, हर 15 से 21 दिन में छिड़काव करना चहिये। नोट-सल्फोमिन का छिड़काव सभी प्रकार के कीटनाशकों - फफूंदनाशकों के साथ मिलाकर किया जा सकता है। पंरतु सिर्फ सल्फोमिन का छिड़काव ज्यादा लाभकारी पाया गया है। सल्फोमिन का उपयोग हमारे नियंत्रण के बाहर होने के कारण हम केवल उसकी एकसार गुणवत्ता के अलावा किसी भी प्रकार के नुकसान की जिम्मेदारी नहीं लें सकते हैं।